शक्ति, सत्ता और वैधता

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शक्ति

शक्ति :-  दूसरों के आचरण को अपने लक्ष्य के अनुसार प्रभावित करने की क्षमता को शक्ति कहते हैं।

शक्ति की अन्य परिभाषा :-

1. मेकाइवर के अनुसार :-

मेकाइवर ने अपनी पुस्तक “द वैब ऑफ गवर्नमेण्ट” में शक्ति को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया है।

यह एक ऐसी क्षमता है जिसमें दूसरे से काम लिया जाता है या आज्ञा पालन करवाया जाता है।

2. राबर्ट बायर्सटेड के अनुसार :-

शक्ति, बल, प्रयोग की योग्यता है न की वास्तविक प्रयोग।

शक्ति का बल और प्रभाव से भेद :-

शक्ति और बल को एक ही माना जाता है लेकिन वास्तव में दोनों में अंतर है शक्ति प्रछन्न बल है जबकि बल प्रकार शक्ति  है जब एक पुलिस वाला किसी अपराधी को पकड़ने जाता है तब वह शक्ति का प्रयोग करता है लेकिन अपराधी पर डंडे बरसाए तो बल का प्रयोग करता है।

शक्ति के विभिन्न रूप या शक्ति के विभिन्न आयाम :-

राजनीति विज्ञान में शक्ति को बहुत विस्तृत प्रयोग होता है इसके आयाम निम्न हैं :-

  1. राजनीतिक शक्ति :-   इसका सामान्य अर्थ समाज के मूल्यवान संसाधनों से है जैसे टैक्स, पुरस्कार, पद, प्रतिष्ठित, दंड आदि। सामान्य राजनीति में शक्ति का प्रयोग न्यायपालिका करती हैं जिसे हम शक्ति का औपचारिक अंग कहते हैं।
  2. आर्थिक शक्ति :-  इसका सामान्य अर्थ उत्पादनों के साधनों व धन से होता है आर्थिक शक्ति कई तरीकों से राजनीतिक शक्ति को प्रभावित करती हैं। मार्क्सवाद का मानना है कि “सब तरह की शक्ति आर्थिक शक्ति की नींव पर टिकी होती है।
  3. विचारधारात्मक शक्ति :-  इसका सामान्य अर्थ होता है कि विचारों का समूह जिसके आधार पर हमारे दृष्टिकोण का विकास होता है ये शक्ति लोगों की सोचने समझने के ढ़ंग को प्रभावित करती हैं।

शक्ति की संरचना :-

अर्थ :-  इसकी संरचना एक ऐसी संकल्पना के रूप में की जाती है जिससे एक पक्ष दूसरे पक्ष पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है।

शक्ति संरचना के प्रमुख रूप :-

शक्ति संरचना के प्रमुख चार रूप होते हैं जो निम्न है:-

1. वर्ग प्रभुत्व का सिद्धांत :-

इस सिद्धांत को देने वाले मार्क्सवाद है जिसका सामान्य अर्थ है कि समाज आर्थिक आधार पर वर्गों में बांटा हुआ है। (अमीर व गरीब)

नोट :-  मार्क्सवाद यह कहता है कि प्रत्येक कार्य के पीछे आर्थिक स्वार्थ छिपा रहता है। जैसे मां के द्वारा अपने बच्चे का लालन पालन करना व बच्चों के द्वारा माता पिता की सेवा करना।

2. विशिष्ट वर्गीय सिद्धांत :-

इसके अनुसार भी समाज शक्ति के आधार पर दो वर्गों में बांटा गया है।

  1. विशिष्ट वर्ग (शक्तिशाली)।
  2. सामान्य वर्ग (जिसके ऊपर शक्ति प्रभुत्व होती है।

विशिष्ट वर्ग में नेता, राजनेता, उद्योगपति, वकील, प्रोफेसर, डॉक्टर,आदि आते हैं जो सामान्य जन पर अपनी शक्ति का प्रयोग करते हैं।

इटली में विल्फ्रड परेटो (द माइण्ड एण्ड सोसायटी), गीतानो मोस्का (द रूलिंग क्लास), जर्मनी के राबर्ट मिशेल्स (पॉलीटिकल पार्टीज) ये तीनों पुस्तक विशिष्ट वर्गीय सिद्धांत से संबंधित है।

3. नारीवादी सिद्धांत :-

इस सिद्धांत का मानना है कि समाज में शक्ति के विभाजन का आधार लैंगिक है (स्त्री पुरुष में भेदभाव) समाज की सारी शक्ति पुरुष वर्ग के पास हैं उस शक्ति का प्रयोग महिला के ऊपर किया जाता है इसके लिए विश्व में समय-समय पर नारी मुक्ति आंदोलन प्रारंभ हुई। लेकिन हमारे देश में नारी की पूजा देवताओं के सम्मान की जाती है।

4. बहुलवादी सिद्धांत :-

यह सिद्धांत तीनों से अलग है इसमें सारी शक्ति किसी एक वर्ग के हाथों में न होकर अनेक समूह में बंटी होती हैं ये सिद्धांत शक्तिहिन व्यक्तियों को शक्ति संपन्न बनाकर समरस समाज की स्थापना पर जोड़ देता है।

 

सत्ता

सत्ता का सामान्य अर्थ :-

सत्ता किसी व्यक्ति संस्था नियम आदेश का ऐसा गुण है जिसके कारण उसे सही मानकर स्वेच्छा से उसके निर्देशों का पालन किया जाता है।

परिभाषा हेनरी फेयोल के अनुसार “सत्ता आदेश देने का अधिकार है और आदेश का पालन करवाने की शक्ति हैं”

सत्ता के प्रकार या सत्ता के प्रमुख आधार

  1. विश्वास :-  विश्वास जितना गहरा होगा सत्ताधारी को आदेशों की पालना उतनी ही सरलता से होगी। इसलिए उसे शक्ति का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा।
  2. एकरूपता :-  विचारों और आदर्शों की एकरूपता भी सत्ता के लिए महत्वपूर्ण है अथार्थ वैचारिक एकरूपता स्वत: ही आज्ञा पालन की स्थिति पैदा कर देती हैं जिसके कारण ही राज्य व्यवस्था उदारवाद व समाजवाद का सहारा लेती है
  3. लोकहित :-  लोक कल्याण भी सत्ता का नाखून आधार है हम अधिकांश कानूनों को दबाव व दंड शक्ति के रूप से नहीं करते अपितु लोगों की भलाई हो सके इसलिए करते हैं जैसे कर जमा करवाना, यातायात नियमों का पालन करना।
  4. दबाव :- कई बार सत्ता पर पर दबाव का प्रयोग किया जाता है कुछ व्यवस्था में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन पर सत्ता के अन्य आधारों का कम प्रभाव रहता है और जो दमन और दबाव की भाषा समझते हैं

मैक्स वैबर के अनुसार सत्ता के रूप

मैक्स वैबर ने सत्ता के तीन प्रमुख रूप बताए हैं जो निम्न है

  1. परंपरागत सत्ता इस सत्ता के अनुसार यह माना जाता है कि जो व्यक्ति या वंश परंपरा के अनुसार सत्ता का प्रयोग कर रहा हैं सत्ता उसी के पास बनी रहनी चाहिए। जैसे घरों में सत्ता वृद्धजनों के पास होती हैं।
  2. करिश्माई सत्ता ये सत्ता किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत गुणों और चमत्कारों पर आधारित है इसमें जनता उसी व्यक्ति के इशारे पर बड़े से बड़ा त्याग करने को तैयार रहती है इसमें सत्ता का आधार भावनाएं होती है। जैसे नरेंद्र मोदी जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी आदि
  3. कानूनी तर्कसंगत सत्ता इसका आधार पद होता है व्यक्तित्व नहीं। जैसे शिक्षक जिला कलेक्टर प्रधानमंत्री आदि

वैधता

वैधता का सामान्य अर्थ :-

इस शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के Legitmus से हुई है जिस का सामान्य अर्थ Lawful अर्थात वैधानिक। 

परिभाषा :-

शक्ति और सत्ता के बीच की कड़ी को वैधता कहते हैं।

वास्तव में शक्ति और सत्ता के बीच का कार्य वैधता करती हैं अर्थात कोई भी शासन शक्ति के आधार पर व्यक्ति को बाहरी रूप से नियंत्रण करता है लेकिन वैधता के आधार पर वह लोगों के हृदय पर शासन करता है। इस तरह शक्ति सत्ता वैधता की अवधारणा में एक दूसरे के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी है।

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